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Full text of "Haryana Gazette, 1987-12-03, No. 6"

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338 


HARYANA GOVT . CAZ., FFB.9,1988 ( MAGHA 20 , 1909 SAKA) 


( PART 


4TA 


श्रम विभाग 


प्रादेश 


दिनांक 1 दिसम्बर , 1987 


. 


सं ० प्रो ० वि ०/एफ ० डी ०/ 86-87/ 47971.-- चुकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि प्रशासक, मार्किट कमेटी , 
पलवल , जिला फरीदाबाद, के श्रमिक श्री अशोक कुमार , पुत्र श्री नाथा • मार्फत मकान नं 0 176, वार्ड नं . 1, शास्त्री 
कालोनी, पुराना फरीदाबाद तथा प्रबन्धको क मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले के सम्बन्ध में कोई प्रौद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल इस विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिये , मब , प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947, की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( घ ) द्वारा प्रदान की 
गई भक्तियों का प्रयोग करते हुये हरियाणा के राज्यपाल |इसके द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7क के अधीन गठित प्रौद्योगिक 
भधिकरण , हरियाणा, फरीदाबाद, को नीचे विनिर्दिष्ट मामला जो कि उक्त प्रवन्धकों तथा श्रमिकों के बीच या तो विवादग्रस्त मामला 
है अथवा विवाद से सुमंगत या संबंधित मामलो /मामले हैं न्याय निर्णय एवं पंचाट 3 मास में देने हेतु निर्दिष्ट करते हैं : 

क्या श्री अशोक कुमार की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नही , तो वह किस राहत 
का हकदार है ? 

दिनांक 3 दिसम्बर, 1987 
सं ० प्रो ० वि ० एफ ० डी 0/ 185-87/ 48391.-- चूंकि . हरियाणा के राज्यपाल की राये है कि मै ० मुख्य प्रशासक 
फरीदाबाद मिश्रित प्रशासन फरीदाबाद के श्रमिक श्री राम किशन, पत्न राम स्वरूप , गांव बुडेना , डा ० बरोली , तहसील बल्लवगढ़ 
जिला फरीदाबाद तथा प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले के सम्बन्ध में कोई प्रौद्योगिक विवाद है ; 


और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल इस विवाद को न्याय निर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते है ; 

इसलिए, अब, औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947, की धारा 10 की उप-धारा ( 1 ) के खण्ड ( घ ) द्वारा प्रदान 
की गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7 क के अधीन गठित 
मौद्योगिक अधिकरण , हरियाणा , फरीदाबाद, को नीचे विनिर्दिष्ट मामला जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिकों के बीच या तो 
विवादपरत मामला/ मामले है अथवा विवाद से सुसंगत या सम्बन्धित मामला /मामले है न्यायनिर्णय एवं पंचाट 3 मास में देने 
हेतु निर्दिष्ट करते हैं 


क्या 


श्री राम किशन की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं , तो वह किस राहत का 


हकदार है ? 


सं ० प्रो ० वि ०/ एफ डी/ 219-85/ 48398.-- चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राये है कि मै , पोलीमार पेपरज 
लि ०, 12/6, मपुरा रोड़, फरीदाबाद के श्रमिक श्री केवल सिंह मार्फत फरीदाबाद कामगार यूनियन 2/7, गोपी कालोनी, 
पुराना फरीदावाद तथा प्रवन्धकों के मध्य इस में इसके वाद लिखित मामले के सम्बन्ध में कोई औद्योगिक विवाद है ; 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल इस विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिए , . अब, प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1) के खण्ड ( घ ) द्वारा प्रदान की 
गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7क के अधीन गठित प्रौद्योगिक 
अधिकरण , हरियाणा, फरीदाबाद को नीचे विनिर्दिष्ट मामला जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त 
मारला/ मामले हैं अथवा विवाद से सुसंगत या सम्बन्धित मामला /मामले है न्यायनिर्णय एवं पंचाट 3 मास में देने हेतु निर्दिष्ट 
करते हैं : 

क्या श्री केवल सिंह की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं , तो वह किस राहत का 


हकदार है ? 


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